करीब 700 साल पहले निजामुद्दीन के शागिर्द फौजा नसीरूद्दीन ने इस बावड़ी का निर्माण कार्य कराया था। इसके बाद उन्हें हजरत निजामुद्दीन औलिया ने चिराग-ए-दिल्ली का खिताब दिया था। फिलहाल आगा खां ट्रस्ट बावड़ी की देखरेख करता है।from Jagran Hindi News - delhi:new-delhi-city https://ift.tt/3262DHB
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