अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अरुण सुखीजा के कोर्ट ने आदेश में कहा कि हत्या के हर मामले में जरूरी नहीं कि किसी व्यक्ति ने आरोपित को अपराध करते हुए देखा हो।मामलों में कोर्ट का सर्वोच्च कर्तव्य होता है कि वह साक्ष्यों को कानून की ²दृष्टि से परख कर निर्णय तक पहुंचे।from Jagran Hindi News - delhi:new-delhi-city https://ift.tt/3HYJxq1
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