मोहन भागवत ने कहा कि कला केवल मनोरंजन के लिए नहींबल्कि उन्नयन के लिए भी होती है। मेरा कला पर कोई अध्ययन नहीं हैलेकिन कभी-कभी मुझे कला देखने सौभाग्य मिलता है।इससे मैं यह कह सकता हूं कि योगासन और भारतीय युद्ध कला की मुद्राएं और हाथ की कलाएं एकसमान हैं।from Jagran Hindi News - delhi:new-delhi-city https://ift.tt/PTNXfUn
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